रिषिकेष, मार्च 12 -- परमार्थ निकेतन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में चौथे दिन गुरुवार को साधकों ने भारत की प्राचीन विधा आयुर्वेद का ज्ञान लिया। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि आयुर्वेद सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। यह प्राचीन विधा आज भी करोड़ों लोगों को स्वस्थ जीवन की राह दिखा रही है। महोत्सव के दौरान गुरुवार को 'विजडम टॉक्स आध्यात्मिक संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें आयुर्वेद समग्रता का संतुलन, समन्वय और योगिक जीवन के माध्यम से स्वास्थ्य विषय पर विशेषज्ञों ने जानकारी प्रदान की। सत्र में विशेषज्ञ डॉ. रामकुमार, डॉ. कृष्णा पंकज नारम और मारिया अलेजांद्रा अवचारियन ने विचार साझा किए। साधकों को बताया कि आयुर्वेद कैसे प्रकृति के साथ सामंजस्य में जीवन जीने और शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कल्याण को विकसित करने का एक कालातीत दर्शन है। ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.