आजमगढ़, नवम्बर 1 -- आजमगढ़, संवाददाता। देवोत्थान एकादशी पर शनिवार को घर-घर तुलसी और शालिग्राम का विवाह हुआ। घर से लेकर प्रतिष्ठान तक दीपक की रोशनी से जगमग हो गए। लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। इससे पहले लोगों ने नदियों के संगम और पवित्र सरोवरों में आस्था की डुबकी लगाई। हालांकि शनिवार को अपराह्न तीन बजकर 24 मिनट पर भद्रा लगने से कुछ लोग तुलसी और शालिग्राम का विवाह रविवार को करेंगे। कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली देवोत्थान एकादशी को हरि प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने तुलसी को पत्नी रूप में स्वीकार किया था। यही वजह है कि सनातनी परंपरा में प्रत्येक वर्ष इस दिन माता तुलसी का भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप के साथ विवाह किया जाता है। देवोत्थान एकादशी को लेकर काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने व...