रामपुर, मार्च 23 -- आदर्श रामलीला मैदान परिसर में चल रही देवी कथा के चौथे दिन पूज्य व्यास देवराज ने मां पार्वती को नारद एवं सप्त ऋषियों ने भगवान शंकर के अनेक दोषौ को बताया और उनसे विवाह करने को मना किया परंतु मां पार्वती ने देवों के देव महादेव का ही घोर तपस्या कर वर्णन किया। वर्णन करते हुए कहा कि शिव शमशान के वासी हैं उनके गण पाखंड ,पीपल पर रहने वाले जिन्न एवं भूत ही हैं, शमशान का अर्थ ही है जहां पहुंचकर सब समान हो जाते हैं उसी का नाम शमशान है सभी भूत प्रेत भगवान शिव के बाराती बैंड नृत्य करते हुए हिमालय के यहां मां पार्वती का वर्णन करने पहुंचे और धूमधाम के साथ मां पार्वती का शिव से विवाह हुआ। सभी भक्तों ने सुंदर बधाइयों पर नृत्य किया। पुष्प वर्षा के साथ भक्तों द्वारा शिव पार्वती की झांकी का पूजन किया गया।

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