गंगापार, जुलाई 23 -- देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होने वाले चातुर्मास के दौरान मांगलिक कार्य नहीं किए जाते, लेकिन इस बार देवशयनी एकादशी के पहले ही शादियों पर रोक लग चुकी है। 25 जुलाई शनिवार को देवशयनी एकादशी से पहले ही मांगलिक व शुभ कार्यों पर विराम लग चुके हैं। अब कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवोत्थान एकादशी 20 नवंबर को भगवान विष्णु के जागृत होने के बाद विवाह और अन्य शुभ कार्यों का मुहूर्त मिलेगा। ज्योतिष विशेषज्ञ पं. ध्रुव कुमार शास्त्री के अनुसार चातुर्मास का प्रारंभ देवशयनी एकादशी से होता है, जो आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को होती है। देवशयनी एकादशी को चातुर्मास का पहला दिन होता है। चातुर्मास में 4 महीने तक विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन आदि जैसे कार्य नहीं होंगे। चातुर्मास का समापन देवउठनी एकादशी को होता है, उसके बाद से मांगलिक कार...