नई दिल्ली, अप्रैल 10 -- देश के एक दागदार न्यायमूर्ति का इस्तीफा भले देर से आया हो, पर यह स्वागतयोग्य है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रहे यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को अपना इस्तीफा सौंपते हुए गहरी पीड़ा का इजहार किया है। वैसे, यह कहने में हर्ज नहीं कि जिस वजह से यह इस्तीफा हुआ है, उससे सबसे ज्यादा पीड़ा देशवासियों को हुई है। पिछले वर्ष 14-15 मार्च को दिल्ली स्थित उनके आधिकारिक आवास पर बरामद बेहिसाब नकदी के आरोपों की संसदीय जांच चल रही थी और महाभियोग की तैयारी थी। इस इस्तीफे से अव्वल तो यह होगा कि संसदीय जांच या महाभियोग का विशेष महत्व नहीं रह जाएगा। यह बात गौर करने की है कि राष्ट्रपति को भेजे गए इस्तीफे में न्यायमूर्ति वर्मा ने किसी भी कारण का जिक्र नहीं किया है, पर कारण को समझना कठिन नहीं है। वैसे, यह इस्तीफा संसदीय ...