कन्नौज, मार्च 17 -- छिबरामऊ, संवाददाता। परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयास सिर्फ कागजों में तो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में दूर-दूर तक कुछ नजर नहीं आ रहा है। वार्षिक परीक्षाएं इस समय मखौल बनकर रह गई हैं। हालत यह है कि परीक्षा के दूसरे दिन किसी भी विद्यालय में प्रश्नपत्र पूरे नहीं पहुंचे। शायद ही कोई विद्यालय हो, जहां प्रश्नपत्र पूरे पहुंचे हों। बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही और उपेक्षा का परिणाम यह है कि सोमवार से शुरू हुई वार्षिक परीक्षाओं के पहले दिन किसी भी विद्यालय में प्रश्नपत्र ही नहीं पहुंचे। शिक्षकों ने किसी तरह जुगाड़ कर पहले दिन की परीक्षा संपन्न करा ली। मंगलवार को दूसरे दिन स्कूलों में प्रश्नपत्र तो भेजे गए, लेकिन किसी भी स्कूल में छात्र संख्या के आधार पर पूरे प्रश्नपत्र नहीं भेजे गए। हालत...