गिरडीह, जनवरी 11 -- गांडेय, प्रतिनिधि। आदिवासियों का पांच दिवसीय वंदना पर्व दूसरे दिन शनिवार को भी मनाया गया। बता दें कि वंदना की तैयारी आदिवासी समाज के द्वारा 15 दिन पूर्व से ही शुरू हो गई थी। महिलाएं अपने घरों की साफ-सफाई करती है। महिलाएं अपने घर की आंगन की लिपाई - पुताई करती है। घर की दीवारों में सोहराय का चित्र बनाया जाता है। वहीं घर के पुरुष सदस्य खान-पान की व्यवस्था में लगे रहते हैं। मान्यता है कि वंदना त्योहार के क्रम में स्वर्ग से देवी - देवता धरती पर आकर गांव- गांव, घर-घर भ्रमण करते हैं। वंदना के प्रथम दिन को उम माहा कहा जाता है। प्रथम दिन घर के सभी लोग नहा धोकर सभी कृषि उपकरण को नदी तालाब में ले जाकर धोते हैं। दोपहर बाद सभी पुरुष गोट टांडी जाते हैं। जोग मांझी घर -घर से सामग्री इकट्ठा करते हैं। नायके हड़ाम मरांग बुरु की आराधना कर...
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