मेरठ, मार्च 3 -- मेरठ। पवित्र माह रमजान उल मुबारक का पहला असरा रहमत पूरा होने के बाद अब दूसरा असरा मगफिरत (माफी) का चल रहा है। रोजेदार पल-पल अल्लाह तआला की इबादत और कुरआन-ए-पाक की तिलावत में बिता रहे है। इस्लामी मान्यताओं के अनुसार रमजान का दूसरा असरा 11वें रोजे से 20वें रोजे तक होता है और इसे खास तौर पर गुनाहों की माफी मांगने का समय माना जाता है। मौलाना मशहूदुर्रहमान शाहीन जमाली ने बताया कि रमजान के पहले दस दिन अल्लाह की रहमत के होते हैं, जिनमें बंदों पर विशेष कृपा बरसती है। वहीं दूसरा असरा अपनी खताओं की तौबा करने और अल्लाह से सच्चे दिल से माफी मांगने का बेहतरीन मौका होता है। रमजान माह का दूसरा असरा चल रहा है। मस्जिदों में इबादत का माहौल और भी रूहानी हो गया है। रोजेदार नमाज, तिलावत-ए-कुरआन और दुआओं में मशगूल नजर आ रहे हैं। उलेमा के मुताब...