जयपुर, जून 30 -- जगन गुर्जर. एक ऐसा नाम, जिसने करीब एक दशक तक राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की पुलिस की नींद उड़ाए रखी। चंबल के बीहड़ों में उसका सिक्का चलता था और उसके नाम से गांवों में सन्नाटा छा जाता था। कभी लाखों का इनामी, कभी पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती और कभी संसद में जिसके एनकाउंटर की मांग उठी। लेकिन आखिरकार उसी जगन की कहानी अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल की एक बैरक में खत्म हो गई। यह कहानी सिर्फ एक डाकू की नहीं, बल्कि उस रास्ते की भी है, जहां बंदूक का अंत हमेशा हिंसा और अकेलेपन में होता है।बीहड़ों में पैदा नहीं हुआ, हालात ने बनाया डाकू धौलपुर जिले के डांग इलाके के भवुतीपुरा गांव का रहने वाला जगन किसी अपराधी परिवार से नहीं था। उसके पिता शिवचरण गुर्जर मंदिर में पूजा-पाठ करते थे और दूध बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। लेकिन साल ...