नई दिल्ली, जुलाई 22 -- केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को एक 33 वर्षीय धर्मगुरु को 16 वर्षीय लड़की के दुष्कर्म के लिए मिली उम्रकैद घटाकर 10 साल कर दी। आरोपी की सजा को बरकरार रखते हुए, जस्टिस राजा विजयराघवन वी. और के. वी. जयकुमार की पीठ ने कहा कि सत्र अदालत द्वारा दी गई सजा 'कठोर और जरूरत से ज्यादा'थी। पीठ ने गौर किया कि यह अपराध 2014 में किया गया था, जो आईपीसी की धारा-376 (दुष्कर्म) में 2018 में किए गए उस संशोधन से काफी पहले की बात है, जिसमें न्यूनतम सजा को सात साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया था। आरोपी को पोक्सो अधिनियम की धारा 4 और आईपीसी की धारा 376 के तहत अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था, और दोनों ही मामलों में अधिकतम सजा उम्रकैद थी। पीठ ने यह भी गौर किया कि इस मामले में सत्र अदालत ने आरोपी को अधिकतम सजा देने का कोई कारण नहीं बताया था।

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