नई दिल्ली, अप्रैल 7 -- एक बार दुर्वासा मुनि, देवताओं की नगरी अमरावती में गए। पूरा शहर उत्सव की शोभा से दमक रहा था। दुर्वासा ने वहां उपस्थित नारद से इसके बारे में पूछा, 'इस उत्सव का क्या कारण है?'देवर्षि नारद ने जवाब दिया, 'आज पूर्णिमा का दिन है। देवताओं के राजा इंद्र, माता अदिति की पूजा कर रहे हैं।' उत्सव की वैभवपूर्ण तैयारियों को देखकर दुर्वासा मुनि आश्चर्य चकित हुए । सैकड़ों सुवर्ण थालियों में फूलों को सजाकर मां की पूजा के लिए रखे जा रहे थे । दुर्वासा मुनि इन तैयारियों के बारे में मां को स्वयं बताना चाह रहे थे । वे मां के द्वार पर गए। द्वारपालकों ने मुनि से कहा 'हे मुनिवर! मां बीमार हैं। आप उनसे अभी मिल नहीं सकते।' द्वारपालकों की बातों को नजरंदाज कर मुनि सीधे मां के कक्ष में गए, जहां देव माता अदिति शैय्या पर लेटी हुई थीं। मुनि ने देवी स...