सीतामढ़ी, जनवरी 23 -- रीगा। सरस्वती पूजा से पहले रेवासी पंचायत के पकड़ी गांव में एक अलग ही रौनक देखने को मिल रही है। यहां की दो किशोर बहनें 17 वर्षीय दुर्गा कुमारी और 15 वर्षीय शालू कुमारी अपने हुनर और मेहनत से न सिर्फ मां शारदे की सुंदर मूर्तियां गढ़ रही हैं, बल्कि अपने परिवार की आर्थिक संबल भी बन चुकी हैं। उनके हाथों से बनी मूरतें इन दिनों आसपास के गांवों के पूजा पंडालों और घरों में आस्था और सौंदर्य की छटा बिखेर रही हैं। परिवार में कुम्हारी कला पीढ़ियों से चली आ रही है। पकड़ी गांव निवासी गौरीशंकर पंडित वर्षों से परंपरागत कुम्हारी कार्य करते आ रहे हैं। यही विरासत अब उनकी बेटियों की पहचान बन गई है। बचपन से ही पिता के साथ मिट्टी गूंथने, सांचे भरने, आकार देने और रंग-रोगन करने वाली दुर्गा और शालू आज पूरी कुशलता से मूर्तियां तैयार कर रही हैं।...