नई दिल्ली, फरवरी 23 -- राष्ट्रीय राजधानी स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) का एक बार फिर हिंसक राजनीति की वजह से चर्चा में आना दुखद ही नहीं, शर्मनाक भी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उचित ही इसे गंभीरता से लिया है। उच्च शिक्षा के इस परिसर में अशांति फैलाने की किसी भी कोशिश या साजिश का यथोचित उपचार होना चाहिए। देर रात में, जब छात्रों के पढ़ने या सोने का वक्त होता है, तब जेएनयू में गुटों के बीच झड़पें हो रही थीं। सोमवार के शुरू होते ही रात के डेढ़ बजे जेएनयू में उपद्रव की स्थिति बन गई। छात्रों का वाम गुट इन दिनों कुलपति के इस्तीफे की मांग कर रहा है। इस मांग के पक्ष में चल रहे प्रदर्शन के बाद ही स्थितियां बिगड़ीं और छात्रों के बीच झड़प हुई। मोटे तौर पर हम जानते हैं कि जेएनयू में छात्र वामपंथी और दक्षिणपंथी खेमों में बंटे हुए हैं। अक्...
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