विधि संवाददाता, जून 14 -- UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad high court) ने एक आदेश में कहा है कि उत्तर प्रदेश किराया विनियमन अधिनियम लागू होने के बाद विवाद की सुनवाई सिर्फ किराया प्राधिकारी ही कर सकता है। दीवानी अदालत को ऐसे मुकदमे सुनने का अधिकार नहीं है। ऐसे में दीवानी मुकदमा पोषणीय नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने श्रीराम व अन्य की पुनरीक्षण याचिका पर दिया है। मामले के तथ्यों के अनुसार मकान मालिक शिवसेवक शर्मा ने हाथरस के जिला जज के समक्ष वाद दाखिल कर बढ़ा हुआ किराया मांगा था। किरायेदारों ने सीपीसी के आदेश 7 नियम 11 के तहत अर्जी देकर कहा कि धारा 38(1) के तहत दीवानी अदालत को क्षेत्राधिकार नहीं है इसलिए वाद खारिज किया जाए। कोर्ट ने यह अर्जी खारिज कर दी, जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी। यह भी पढ़ें- डॉक्टर...