मुजफ्फर नगर, सितम्बर 10 -- देश में बड़े उद्योग घरानों के दिवालिया होने का सबसे सीधा और घातक असर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) पर पड़ रहा है। करोड़ों रुपये का माल भेजने के बाद भुगतान अटकने और सरकार को जीएसटी पहले ही जमा करने के कारण एमएसएमई क्षेत्र दोहरी मार झेलने को मजबूर है। इस संकट से छोटे उद्यमियों को उबारने के लिए इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) में बड़े बदलावों की मांग उठाई है। आईआईए मुजफ्फरनगर चैप्टर के चेयरमैन अमित जैन ने केंद्रीय वित्त मंत्री को भेजे पत्र भेजा है। कार्यालय पर हुई बैठक में बताया गया कि सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिए बकाया रकम केवल एक बिल नहीं, बल्कि उनकी कार्यशील पूंजी और अस्तित्व का सवाल है। आईआईए सहारनपुर डिवीजन के मंडल चेयरमैन पवन कुमार गोयल ने कहा ...