नई दिल्ली, अक्टूबर 9 -- एसआईआर के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सड़कों पर उतरे विपक्ष के साथ सत्तारूढ़ खेमा दो-दो हाथ तो कर ही रहा है, लेकिन उसकी चिंता विपक्ष से ज्यादा आम जनता के बीच भरोसे को लेकर है। यही वजह है कि भाजपा और उसके सहयोगी दल दिल्ली के दंगल से ज्यादा ध्यान अपने जमीनी कार्यक्रमों और अभियानों पर केंद्रित कर रहे हैं। इस मामले में सोशल मीडिया के जरिये बनने वाले संभावित नकारात्मक प्रभाव की काट के लिए राजग सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साध रहा है। संसद के मॉनसून सत्र से अब तक विपक्ष किसी न किसी मुद्दे पर सरकार पर हमलावर है। पहले छात्र आंदोलन और जेन-जी की तीखी प्रतिक्रिया को लेकर सरकार ने बड़े कदम उठाते हुए आंदोलनकारियों की मांगें मान कर उसे समाप्त किया। सरकार का मानना है कि इससे विपक्ष ने जो मंसूबे साध रखे...