नई दिल्ली, अक्टूबर 28 -- ब्रजेश कुमार तिवारी, प्रोफेसर, जेएनयू राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हवा की गुणवत्ता अक्तूबर का अंतिम सप्ताह आते ही एक बार फिर चिंता बढ़ाने लगी है। गत 21 अक्तूबर को दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 245 पहुंच गया, जिसके बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग को पूरे एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (ग्रेप) का पहला चरण लागू करना पड़ा। यह कोई अप्रत्याशित संकट नहीं है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में पीएम 2.5 की वार्षिक औसत सांद्रता 2018 में 114 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर थी। यह 2019 में 109, 2021 में 105, 2022 में 98, 2023 में 100, 2024 में 105 और 2025 में 97 रही। कोविड प्रभावित 2020 में यह 95 दर्ज हुई थी। इस प्रकार 2018 से 2025 के बीच प्रदूषण में लगभग 15 प्रतिशत की कमी ...