बरेली, मार्च 20 -- गांव के चैपाल में चहकती गौरैया, मीठे-मीठे गीत सुनाती गौरैया, गुड़िया को धीरे से रिझाती गौरैया, याद आज आती है ... राकेशधर द्विवेदी की कविता का यह अंश हमें स्मृतियों में ले जाता है जहां गौरैया की चहकती, फुदकती तस्वीर उभरती है। ये पुराने समय की बात है। अफसोस अब ऐसा नहीं होता। यह चंचल चिड़िया हमारे घर-आंगन से दूर हो गई। दुनियाभर में गौरैया की 26 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से 5 भारत में मिलने का दावा विशेषज्ञ करते हैं लेकिन बीते समय में इनकी संख्या में लगातार गिरावट आई है। हमारा जरा सा प्रयास, दाना-पानी और थोड़ा सा प्यार पर्यावरण के इस पहरेदार को फिर से बुला सकता है। हर वर्ष 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है। इस बार की थीम है 'छोटे पक्षियों को बचाना, अपने भविष्य को बचाना।' आंध्र यूनिवर्सिटी के शोध में गौरैया क...