गिरडीह, अप्रैल 25 -- गिरिडीह, प्रतिनिधि। जब आधुनिकता की दौड़ में रिश्ते पीछे छूट रहे हैं, तब सरस्वती शिशु विद्या मंदिर बरगंडा ने गुरुवार को एक मिसाल पेश की। विद्यालय परिसर में आयोजित भव्य दादा-दादी/नाना-नानी सम्मान समारोह 2026 में परंपरा, संस्कार और भावनाओं का ऐसा संगम दिखा कि हर आंखें नम हो गई। मंच संचालिका मोनालिसा के कुशल संचालन में समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं वंदना से हुआ। प्रधानाचार्य आनंद कमल ने पधारे हुए शताधिक दादा-दादी, नाना-नानी का अंगवस्त्र व पुष्पगुच्छ से अभिनंदन कर कहा कि आप हमारे विद्यालय के जीवंत संस्कार-स्तंभ हैं। आपके बिना शिक्षा अधूरी है। रूपम ने विषय प्रवेश में कहा कि दादी की लोरी और दादा की कहानियां ही बच्चे का पहला स्कूल है। इनकी गोद में ही चरित्र निर्माण होता है। इसके बाद विद्यालय की बहन...