विधि संवाददाता, जुलाई 19 -- UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में वकालत के पेशे में कथित अपराधी तत्वों और फर्जी डिग्रीधारी अधिवक्ताओं की बढ़ती मौजूदगी पर गहरी चिंता जताई है। कहा है कि यदि समय रहते इस प्रवृत्ति पर अंकुश नहीं लगाया गया तो न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास कमजोर होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिवक्ता केवल अपने मुवक्किल के प्रतिनिधि नहीं, बल्कि न्याय वितरण प्रणाली के अभिन्न अंग होते हैं। ऐसे में उनके आचरण और पेशे की शुचिता बनाए रखना बार कौंसिल और न्यायपालिका दोनों की साझा जिम्मेदारी है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने मोहम्मद कफील की याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं के आपराधिक रिकॉर्ड, फर्जी डिग्रियों और बार कौंसिल की अनुशासनात्मक व्यवस्था पर व्यापक समीक्षा की। अदालत ने राज्य के डीजीपी, डीजीपी (अभियोजन), यू...