लखनऊ, अगस्त 21 -- लखनऊ, विधि संवाददाता। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लगभग 30 साल पुराने दहेज हत्या के मामले में तीन आरोपियों की सजा रद्द कर दी है। न्यायालय ने कहा कि अभियोजन यह साबित करने में विफल रहा कि मृतका की मौत से ठीक पहले उसे दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया गया था। ऐसे में धारा 304-बी आईपीसी के तहत दहेज हत्या की धारणा लागू नहीं की जा सकती। न्यायमूर्ति मनोज बजाज की एकल पीठ ने यह निर्णय शिव नारायण उर्फ सूर्य नारायण, जय नारायण और पटेश्वर की अपील स्वीकार करते हुए पारित किया। मामला उर्मिला की वर्ष 1991 में हुई मौत से जुड़ा था। अभियोजन के अनुसार 19/20 सितंबर 1991 की रात उर्मिला लापता हुई और 21 सितंबर को उसका शव ससुराल के पास स्थित कुएं से बरामद हुआ। आरोप था कि दहेज के लिए प्रताड़ित करने के बाद उसकी हत्या कर शव कुएं में फेंक दिया गया। कोर...