हरदोई, अप्रैल 30 -- हरदोई। जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार निगम ने बताया कि समाज में व्याप्त दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 के प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जा रहा है। इस कानून के तहत दहेज लेना और देना दोनों ही दंडनीय अपराध हैं। उन्होंने कहा कि विवाह के दौरान वर पक्ष द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपत्ति या मूल्यवान वस्तुओं की मांग करना अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर कम से कम पांच वर्ष के कारावास और 15 हजार रुपये या दहेज की कीमत के बराबर (जो अधिक हो) जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा यदि कोई व्यक्ति विवाह के बदले संपत्ति या व्यापार में हिस्सेदारी का प्रस्ताव विज्ञापन के माध्यम से देता है, तो उसे छह माह से पांच वर्ष तक की सजा हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि विवा...