ललितपुर, जून 30 -- मड़ावरा। बुन्देलखंड स्थित अतिपिछड़े जनपद के दूरस्थ ग्राम मड़ावरा में रहने वाले डा. बिरधीचन्द जैन सिर्फ चिकित्सक ही नहीं बल्कि गरीब ग्रामीणों का भरोसा हैं। उनकी जेब में पैसे हों, तो ठीक। नहीं हों, तो भी कोई चिंता की बात नहीं। डाक्टर की क्लीनिक पर पहुंचने के बाद गरीब मरीज के उपचार से लेकर भोजन तक की जिम्मेदारी उनकी हो जाती है। अभी भी उनके यहां दस रुपये की पुड़िया में मरीजों चंगे हो जाया करते हैं। मड़ावरा में रहने वाले डा. बिरधीचन्द जैन पुत्र स्र्वीय पूरनचन्द जैन ने सन 1974 में बीएमएम किया था। डाक्टरी की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह जिला चिकित्सालय में मरीजों का उपचार करने लगे। यहां लगभग दो वर्षों तक वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ वह मरीजों का इलाज और आपरेशन करते रहे। इसके बाद 1976 में वह अपने गांव मड़ावरा लौट गए और सारा जीवन गरीब मरीजों ...