मुजफ्फर नगर, अगस्त 30 -- भाद्रमाह के सुद छठ को दिगंबर जैन समाज के दसलक्षण पर्व का दूसरा दिन उत्तम मार्दव धर्म होता है। सभी जैन मंदिरों में उत्तम मार्दव धर्म की पूजा अर्चना की जाती है। दसलक्षण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म मनाया गया। जैन शास्त्रों के अनुसार उत्तम मार्दव का अर्थ है घमंड या अहंकार का अंत करना, अपने जीवन में नम्रता लाना, नम्रता ही परायों को अपना बनाने का शस्त्र है। उत्तम मार्दव धर्म हमें सिखाता है कि तुम्हारा क्या है? यह संपत्ति, ये संबंध, ये शरीर कुछ भी तुम्हारा नहीं फिर अहंकार क्यों? सब एक भ्रम है, और यह भ्रम ही अहंकार को जन्म देता है। जब समझ आ जाए कि जो पास है, वो भी तुम्हारा नहीं है, तब अहंकार खत्म हो जाएगा। चलो, आज अहंकार को छोड़कर मार्दव (मृदुता) को अपनाएँ। शहर के प्रसिद्ध जैन तीर्थ अतिशय क्षेत्र वहलना, मुनीम कालोन...