नई दिल्ली, अक्टूबर 29 -- संघमित्रा शील आचार्य ,प्रोफेसर, जेएनयू कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कई दवाओं की कीमतों में 93 फीसदी तक की कमी इसके मरीजों को बड़ी राहत पहुंचाएगी। भारत में कैंसर की दवाओं और इलाज पर एक मरीज औसतन 3.15 लाख रुपये सालाना खर्च करता है, जो इस बीमारी की गंभीरता के हिसाब से इससे अधिक भी हो सकता है। इसमें दवा की हिस्सेदारी 50 से 60 फीसदी तक हो सकती है। जाहिर है, राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण यानी एनपीपीए द्वारा 543 दवा ब्रांडों और उनकी अधिकतम खुदरा कीमतों में किया गया यह बदलाव मरीजों और उनके परिवार के आर्थिक हितों की रक्षा करेगा। माना जा रहा है, इससे कैंसर मरीजों की सालाना करीब 2,500 करोड़ रुपये तक की बचत हो सकेगी। यह पहल सर्वोच्च न्यायालय की 27 अक्तूबर, 2026 की उस टिप्पणी के संदर्भ में की गई जान पड़ती है,...