किशनगंज, अप्रैल 14 -- टेढ़ागाछ। टेढ़ागाछ प्रखंड एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ की अधिकांश आबादी अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह कृषि पर निर्भर है। यहाँ के खेतों में धान और जूट (पटुआ) की हरियाली तो खूब दिखती है, लेकिन विडंबना यह है कि प्रोटीन का मुख्य स्रोत कही जाने वाली 'दलहन' की फसलें यहाँ के खेतों से लगभग नदारद हैं। क्षेत्र के बहुत कम किसान ही दलहन की खेती की ओर रुख करते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर दालों की उपलब्धता के लिए दूसरे क्षेत्रों पर निर्भर रहना पड़ता है। टेढ़ागाछ में दलहन की खेती सीमित होने का सबसे प्रमुख कारण यहाँ की मिट्टी की संरचना है। यह भी पढ़ें- धरती पुत्रों की व्यथा: क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु दलहन के लिए अनुपयुक्त, दूरी बना ली इस क्षेत्र की मिट्टी मुख्य रूप से रेतीली-दोमट है और यहाँ जलस्तर काफी ऊंचा रहता है। दलहन की फसलों (जैसे अरहर, ...
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