शामली, मार्च 11 -- थानाभवन दयाल आश्रम मे चल रही श्री मद भागवत कथा मे कथा व्यास आचार्य संजय शास्त्री ने कहा कि भागवत का फल है निस्काम भक्ति । प्रभु भक्ति निस्वार्थ भाव से करनी चाहिए उसमे हमारा कोई निजी स्वार्थ नही होना चाहिए हमको हंस बनाना न की बगुला आडंबर रहित भक्ति हो। प्रभु निश्चल भक्ति को स्वीकार करते है उन्होंने कहा हंस भी सफेद रंग का होता है और बगुला भी सफेद रंग का ही होता है फिर दोनों में क्या भेद (अन्तर) है जिसमें दूध और पानी अलग कर देने का विवेक होता है वही हंस होता है और विवेकहीन बगुला बगुला ही होता है।गुण रूपी दूध को ग्रहण करकेदोष रुपी जल का त्याग करने वाला सन्त रूपी हंस सबका प्रिय होता है, दम्भ और अहंकार का प्रतीक असंत रुपी बगुला अप्रिय होता है।कथा व्यास ने कहा साधु-संत का अर्थ सरल सभ्य सज्जन भक्त परोपकारी है फिर वह चाहे गृहस्थ...
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