प्रयागराज, मई 10 -- जैन समाज की ओर से रविवार को जीरो रोड स्थित जैन मंदिर में धर्मसभा का आयोजन किया गया। जैन मुनि अतुल सागर ने अपने प्रवचन की शुरुआत 'लाख करो पूजा-पाठ, तीर्थ हजार, परोपकार न करने वालों का जीवन बेकार' से की। उन्होंने कहा कि कि दया, करुणा और सेवा ही जैन धर्म की आत्मा है। केवल धार्मिक अनुष्ठान ही पर्याप्त नहीं है, जब तक मनुष्य के भीतर दया, सेवा और सह अस्तित्व की भावना न हो। इसीलिए जैन धर्म 'जीयो और जीने दो' और 'अहिंसा परमो धर्म' का संदेश देकर सभी जीवों के प्रति करुणा रखने की प्रेरणा देता है। मुनि सागर ने कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल स्वयं का कल्याण नहीं बल्कि दूसरों के दुख को दूर करना और परोपकार के मार्ग पर चलना है। यह भी पढ़ें- दया, करुणा और सेवा जैन धर्म की आत्मा : मुनि अतुल सागर मंदिर परिसर में प्रश्नोत्तर कार...
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