पूर्णिया, अक्टूबर 1 -- पूर्णिया, धीरज। जंग-ए-आजादी में टीकापट्टी क्रांतिकारियों के आंदोलन का केंद्र स्थल था। यहीं से सीमांचल और कोसी के इलाके में आंदोलन को धार दिया जाता था। बिहार में भूकंप के बाद 1934 में बापू टीकापट्टी आये थे। टीकापट्टी में जहां बापू के कदम पड़े वहां गांधी सदन है। रानीपतरा सर्वोदय आश्रम भी बापू 1925 में आये थे। इन विरासती धरोहरों में बापू की यादें अब दम तोड़ रही हैं। टीकापट्टी के गांधी सदन में ताला लटका रहता है। रानीपतरा सर्वोदय आश्रम की दशा-दिशा दयनीय है। बापू को सीमांचल और कोसी के इलाके का मौसम और जलवायु काफी भाता था। अपनी आत्मकथा में भी उन्होंने इसका उल्लेख किया है। तभी तो वह तीन बार इन इलाकों में आये। वह पूर्णिया के अलावा अररिया एवं खगड़िया जिला भी गये। चंपारण की तर्ज पर इन जिलों को भी गांधी सर्किट से जोड़ा जाए तो ब...