नई दिल्ली, अगस्त 25 -- हिंदू धर्म में पूजा-पाठ, हवन या कथा के बाद दक्षिणा देने की परंपरा बहुत पुरानी है। ज्यादातर लोग दक्षिणा का मतलब सिर्फ पैसे देने से लगा लेते हैं। लेकिन शास्त्रों में इसका भाव बहुत गहरा और पवित्र बताया गया है। दक्षिणा गुरु या पूजा कराने वाले व्यक्ति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। गलत तरीके से दी गई दक्षिणा पूजा के फल को कम कर सकती है। इसलिए नियमों को समझना जरूरी है।दान और दक्षिणा में अंतर बहुत से लोग दान और दक्षिणा को एक ही चीज मान लेते हैं। शास्त्रों में दोनों का स्वरूप अलग है। दान तब कहा जाता है, जब हम गरीब या जरूरतमंद की मदद के लिए धन, अन्न या वस्त्र देते हैं। इसमें करुणा का भाव प्रमुख होता है। दक्षिणा पूजा या धार्मिक अनुष्ठान कराने वाले योग्य व्यक्ति को आदरपूर्वक दी जाती है। इसमें श्रद्धा और सम्मान का भाव होना चाहिए...