फतेहपुर, अप्रैल 6 -- थरियांव। दशकों से शवदाह गृह की मांग किए जाने के बावजूद अब तक इसका निर्माण नहीं हो पा रहा है। ऐसा तब है, जब करीब तीन बीघा भूमि भी इसके लिए सुरक्षित है। लोगों को अंतिम संस्कार के लिए या तो लंबा चक्कर काटना पड़ता है या फिर खेतों व खाली पड़े स्थान पर शवों का अंतिम संस्कार करना पड़ता है। इससे लोगों में नाराजगी दिख रही है। ब्रजभान सिंह गौतम और राजकिशोर ने बताया कि क्षेत्र की रामपुर थरियांव, टेक्सारी बुजुर्ग, रामपुर इमादपुर, ख्वाजगीपुर, सेमरइया, करियामऊ आदि ग्राम पंचायतों में शवदाह गृह न होने के कारण इन ग्राम पंचायतों के करीब 50 से अधिक गांव के ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए या तो भिटौरा जाना पड़ता है या फिर नौबस्ता। अंतिम संस्कार के लिए जाने में ग्रामीणों को करीब 35 से 40 किमी का अधिक चक्कर काटना पड़ता है। कई बार शवदाह गृह बन...