नई दिल्ली, फरवरी 19 -- त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर महाराष्ट्र के नासिक जिले में गोदावरी नदी के तट पर स्थित है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और भगवान शिव के त्रिनेत्र स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पितृ दोष, काल सर्प दोष, नाग दोष और अकाल मृत्यु से जुड़े दोषों का निवारण करने वाली विशेष पूजा होती है। गरुड़ पुराण, स्कंद पुराण और शिव पुराण में त्र्यंबकेश्वर को पितृ दोष निवारण का प्रमुख तीर्थ बताया गया है। आइए जानते हैं इसकी महिमा और पूजा विधि।त्र्यंबकेश्वर मंदिर का पौराणिक महत्व त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा के अनुसार, यहां भगवान शिव ने गौतम ऋषि को पितृ दोष से मुक्ति दिलाई थी। गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या पर गौ हत्या का दोष लगने से पितृ दोष उत्पन्न हुआ था। भगवान शिव ने यहां प्रकट होक...
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