दरभंगा, अगस्त 8 -- बिरौल प्रखंड के देवकुली स्थित बाबा द्रवेश्वरनाथ महादेव मंदिर का इतिहास त्रेता युग से जुड़ा है। मान्यता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान यहां पूजा की थी। इसे 'वनतरी महादेव' भी कहते हैं। पेश है हमारे प्रतिनिधि शिव कुमार खर्गा की रिपोर्ट:

मंदिर का महत्व मंदिर के मुख्य पुजारी 62 वर्षीय अच्युतानंद गिरी बताते हैं कि यह स्थान पौराणिक काल से ही आस्था का केंद्र रहा है। उस समय यह पूरा इलाका घने जंगल से घिरा था। इसी कारण इसे 'वनतरी महादेव' के नाम से भी जाना जाता है। शिवलिंग स्वयंभू है और मान्यता है कि यहां सच्चे मन से जल चढ़ाने पर बाबा सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

श्रावण माह की तैयारी समय परिवर्तन के साथ-साथ यहां मंदिरों का भी ग्रामीणों की ओर से विशाल रूप दिया गया है, ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कठिनाई नहीं हो।...