नई दिल्ली, जून 30 -- त्रिसंध्या वैदिक परंपरा की एक पवित्र साधना है, जिसमें दिन के तीन प्रमुख कालों में ईश्वर का स्मरण, ध्यान और प्रार्थना की जाती है। प्रातः, मध्याह्न और सायंकाल - इन तीन संधियों पर किया जाने वाला यह अभ्यास शरीर, मन और आत्मा को शुद्ध करने का प्राचीन तरीका है। वैदिक काल से ब्राह्मण, ऋषि और गृहस्थ इस साधना को नियमित रूप से करते थे। आज की भागती-दौड़ती जिंदगी में यह प्रथा कम होती जा रही है, लेकिन जो लोग इसे अपनाते हैं, उन्हें आंतरिक शांति और ऊर्जा का अनोखा अनुभव होता है।त्रिसंध्या का आध्यात्मिक अर्थ त्रिसंध्या शब्द त्रि और संध्या से मिलकर बना है। त्रि का अर्थ तीन और संध्या का अर्थ जुड़ाव या मिलन है। यह दिन के तीन कालों में आत्मा को परमात्मा से जोड़ने की प्रक्रिया है। प्रातः संध्या दिन की शुरुआत को पवित्र बनाती है, मध्याह्न संध...