त्याग और समर्पण का प्रतीक है कृष्ण- सुदामा का मिलन
इटावा औरैया, मई 27 -- महेवा। ग्राम बम्होरा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें एवं अंतिम दिन कथा व्यास आचार्य राहुल त्रिपाठी ने सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष आदि प्रसंगों का सुंदर वर्णन किया। यह भी पढ़ें- सुदामा चरित्र की कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालुसुदामा का चरित्र उन्होंने सुनाया कि पत्नी सुशीला सुदामा जी से बार बार आग्रह करती कि आपके मित्र तो द्वारकाधीश हैं उनसे जाकर मिलो शायद वह हमारी मदद कर दें। सुदामा पत्नी के कहने पर द्वारका पहुंचते हैं और जब द्वारपाल भगवान कृष्ण को बताते हैं कि सुदामा नाम का ब्राम्हण आया है। कृष्ण यह सुनकर नंगे पैर दौङकर आते हैं और अपने मित्र को गले से लगा लेते। उनकी दीन दशा देखकर कृष्ण के आंखों से अश्रुओं की धारा प्रवाहित होने लगती है। सिंघासन पर बैठाकर कृष्ण जी सुदामा के चरण धोते हैं। सभी पटरानियां सुदामा ...
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