नई दिल्ली, मार्च 4 -- देशभर में होली रंग-गुलाल, अबीर और ठहाकों के साथ मनाई जाती है, लेकिन राजस्थान में एक ऐसा गांव भी है जहां होली के तीसरे दिन रंगों से ज्यादा बारूद की गूंज सुनाई देती है। यहां लाठियों की जगह बंदूकें दहाड़ती हैं और पटाखों के साथ छोटी तोपों की गर्जना होती है। यह अनोखी परंपरा 500 साल से भी ज्यादा समय से निभाई जा रही है। हम बात कर रहे हैं उदयपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर बसे मेनार गांव की, जहां 'जमराबीज' के दिन होली एक अलग ही अंदाज में मनाई जाती है।जहां तोप-तलवार से मनती है होली मेनार में होली का तीसरा दिन किसी युद्ध के दृश्य जैसा नजर आता है। आधी रात के बाद गांव में धमाकों की आवाजें गूंजने लगती हैं। हालांकि यहां रंगों से होली भी खेली जाती है, लेकिन असली परंपरा बारूद वाली होली की है। गांव के ओंकारेश्वर चबूतरे पर लाल दरी बिछाकर ...
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