नई दिल्ली, जुलाई 18 -- अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य टकराव अब तेल के कुओं और सैन्य ठिकानों से आगे बढ़कर एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। दोनों देशों के बीच जून में हुआ इस्लामाबाद समझौता पूरी तरह से टूट चुका है और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में फिर से भीषण जंग छिड़ गई है। इस बार दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को घुटनों पर लाने के लिए पानी से जुड़े बुनियादी ढांचे यानी पानी के सप्लाई सिस्टम को अपना मुख्य निशाना बनाया है। पारंपरिक हवाई हमलों के साथ-साथ अब पानी साफ करने वाले प्लांटों को नष्ट करने की होड़ मची है, जिसने सीधे तौर पर आम नागरिकों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया है।पानी को क्यों बनाया जा रहा है युद्ध का नया मैदान? फारस की खाड़ी दुनिया के उन चुनिंदा हिस्सों में से है, जहां प्राकृतिक रूप से पीने का पानी न के बराबर है। ऐसे में पानी का उत्पा...