नई दिल्ली, जुलाई 28 -- कच्चे तेल का भाव 88 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आना आम लोगों के लिए राहत की खबर हो सकती है। पेट्रोल-डीजल से लेकर पेंट और प्लास्टिक तक सेक्टर्स में खुशी है, लेकिन पैकेज्ड फूड कंपनियों के सामने यह एक नई मुश्किल खड़ी कर रहा है। ब्लूमबर्ग ने अपनी खबर में बार्कलेज के विश्लेषकों का हवाला देते हुए कहा कि कम ऊर्जा लागत से ट्रांसपोटेशन, पैकेजिंग और मैन्युफैक्चरिंग पर दबाव तो कम होता है, लेकिन इससे कंपनियों के लिए अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाना और भी मुश्किल हो जाता है।पैकेज्ड फूड कंपनियों पर क्या बीत रही है? पैकेज्ड फूड कंपनियों के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। अगर भारतीय कंपनियों की बात करें तो नेस्ले इंडिया के शेयर इस साल जहां 14 प्रतिशत से अधिक चढ़े हैं तो वहीं ब्रिटानिया के शेयर करीब 10 प्रतिशत टूटे हैं। बीकाजी फूड्स तो...