बांदा, जून 5 -- जलवायु परिवर्तन बांदा। जनपद में पर्यावरण संरक्षण के प्रयास सिर्फ कागजी हैं। पिछले तीन वर्षों में पौने दो करोड़ से ज्यादा पौधे रोपित कर दिए गए, पर संरक्षण के अभाव में ये धरातल पर आधे से ज्यादा सूख गए या फिर पशुओं का निवाला बन गए। वहीं विकास के नाम पर हजारों की संख्या में पेड़ कटवा दिए गए। नतीजे में जिले में तेजी से जलवायु परिवर्तन हो रहा है और लोग असहनीय गर्मी, बाढ़ जैसी दैवी आपदों का कहर झेलने को मजबूर हैं। पेड़ों के अंधाधुंध कटान व अवैध खनन से जिले की सदानीरा केन व बागै जैसी नदियां अब सिकुड़कर नालों में तब्दील हो रही हैं। शहर में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था न होने से सड़कों के किनारे फेंका जा रहा सैकड़ों टन कचरा हवा में जहर घोल रहा है। शहर में नरैनी रोड स्थित ग्रीन बेल्ट में नियम विरुद्ध भवन खड़े हो गए और मौजूदा समय में प्...