मुजफ्फरपुर, सितम्बर 21 -- मुजफ्फरपुर। विद्यार्थियों का भविष्य संवारने वाले शिक्षकों के खुद के बच्चों का भविष्य दावं पर है। समय पर वेतन नहीं मिलने के कारण बच्चों की स्कूल फीस से लेकर लोन की ईएमआई तक नहीं भर पा रहे हैं। यह हाल है बीआरएबीयू के कॉलेजों और पीजी विभागों में पढ़ाने वाले सहायक प्राध्यापक से लेकर प्राध्यापकों का। इनका जीवन कर्ज के भरोसे चल रहा है। तीन-तीन महीने पर मिलने वाली तनख्वाह ने इनकी जिंदगी का हिसाब बिगाड़ दिया है। इनकी पीड़ा है कि घर का राशन हो या दवा, हर जरूरत के सामने जेब खाली मिलती है। मजबूरी में कभी रिश्तेदारों तो कभी परिचितों के आगे हाथ फैलाना पड़ता है। उधार देने वाला भी कभी-कभी मना कर देता है। ऐसे में खुद को ऐसी बेबसी में पाते हैं, जहां अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए हर माह जद्दोजहद करनी पड़ती है। इनका कहना है कि हर म...