बांका, जनवरी 6 -- बौंसी, निज संवाददाता। मंदार की पावन धरती पर मकर संक्रांति के अवसर पर लगने वाला सदियों पुराना बौसी मेला आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। जिस मेले ने पीढ़ियों तक लोक-संस्कृति, व्यापार, आस्था और मनोरंजन को एक सूत्र में पिरोए रखा, वही मेला आज समय, व्यवस्था और उपेक्षा के थपेड़ों से धीरे-धीरे सिमटता जा रहा है। भगवान मधुसूदन मंदिर के ठीक सामने मेला ग्राउंड पर सजने वाला यह मेला केवल एक बाजार नहीं था, बल्कि सनातन परंपरा की जीवंत अभिव्यक्ति था। क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि मेला शुरू होने से महीनों पहले ही दुकानों की कतारें सजने लगती थीं। दूर-दराज़ के इलाकों से व्यापारी पहुंचते थे, विशेषकर लकड़ी के पारंपरिक सामानों की खरीदारी के लिए लोग पूरे वर्ष इंतजार करते थे। एक समय था जब लगभग एक माह तक मेला अपनी पूरी भव्यता के साथ सजा र...