गिरडीह, सितम्बर 14 -- पीरटांड़, प्रतिनिधि। भारतीय संस्कृति में पर्व केवल परंपराओं के निर्वहन का माध्यम नहीं है, बल्कि वे धर्म, संस्कार और पारिवारिक संबंधों को जीवंत बनाए रखने का अवसर भी प्रदान करता है। समाज में तीज ऐसी ही परंपरा है, जिसमें धार्मिक भावना के साथ पारिवारिक एकता और आत्मीयता का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। गुणायतन में साधनारत राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि यह पर्व केवल एक परंपरा निभाने का अवसर नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों को एक साथ बैठने, आपसी प्रेम और आत्मीयता बढ़ाने तथा संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि पर्व त्योहार केवल परम्परा नहीं बल्कि रिश्तों को जोड़ने का आधार है। यही पर्व त्योहार की वास्तविक सार्थकता है। मुनि श्री ने कहा कि जैन संस्कृति में आहार की शुद्धि के साथ भाव...