झांसी, जून 22 -- झांसी,संवाददाता। दिन ब दिन बदलते जलवायु और कम होती बारिश में बुन्देलखंड के लिए तिल की खेती बेहद मुफीद साबित हो सकती है। किसानों की यह समृद्धि का आधार बन सकता है। तिल के गुणवत्ता वाले बीज बेहद कम पानी में ही अच्छी उपज देते है और इस फसल को छुट्टा पशु भी कम नुकसान पहुंंचाते है। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक (कृषिशास्त्र ) डॉ. अर्तिका सिंह ने किसानों को खरीफ मौसम में तिल की खेती अपनाने की सलाह दी है। डॉ. अर्तिका सिंह ने बताया कि तिल कम पानी में अच्छी उपज देने वाली जलवायु-अनुकूल फसल है। इसके अलावा अन्ना पशु भी इस फसल को अपेक्षाकृत कम नुकसान पहुंचाते हैं。 यह भी पढ़ें- तिल बनेगा बुन्देलखण्ड के किसानों की समृद्धि का आधारतिल की खेती की प्रक्रिया तिल के बीजों में लगभग 48 से 52 प्रतिशत तेल के साथ पर्याप्त ...