कन्नौज, अगस्त 12 -- तिर्वा, संवाददाता। देश को अंग्रेजी हुकूमत से आजाद कराने की लड़ाई में तिर्वा का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। 1857 के विद्रोह के बाद जब देशभर में अंग्रेजों के खिलाफ विरोध तेज हो रहा था, तब तिर्वा के क्रांतिकारियों ने भी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन ने यहां आजादी की अलख को और तेज कर दिया। कस्बे और आसपास के गांवों में क्रांतिकारी गुप्त रूप से बैठकें कर अंग्रेजी शासन के खिलाफ रणनीति तैयार करने लगे थे। क्रांति चौक स्थित तमोली मंदिर भी ऐसी ही गतिविधियों का केंद्र बना। नौ अगस्त को यहां क्रांतिकारियों की बैठक के दौरान अंग्रेज अफसरों से उनका आमना-सामना हो गया। दोनों पक्षों में संघर्ष हुआ। क्रांतिकारियों ने एक अंग्रेज दरोगा को खदेड़ दिया। इसके बाद अंग्रेजी पुलिस ने गोलियां चलाईं तो क्रांतिकारियों को...