तिरंगे की आन के लिए सीने पर खाईं गोलियां, अमर हो गए सतीश चंद्र झा
बांका, अगस्त 11 -- बाराहाट, निज प्रतिनिधि। आजादी की लड़ाई का इतिहास केवल महात्मा गांधी सुभाष चंद्र बोस भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे महान नेताओं के संघर्ष तक सीमित नहीं है। इस इतिहास के पन्नों में हजारों ऐसे युवाओं के बलिदान दर्ज हैं।जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।बिहार के बाराहाट की धरती भी ऐसे ही एक अमर सपूत की जन्मभूमि है। नाम था सतीश चंद्र झा 11 अगस्त 1942 को पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने निकले सात छात्रों के जत्थे पर अंग्रेजी पुलिस ने गोली चला दी। इस गोलीकांड में सात युवा शहीद हुए। इनमें बाराहाट के सपूत सतीश चंद्र झा भी शामिल थे। वे उन सात छात्रों में थे।जिन्होंने अंग्रेजी सत्ता के प्रतीक पटना सचिवालय पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के प्रयास में अपने प्राणों की आहुति दी। यह भी पढ़ें- Be...
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