शिमला, दिसम्बर 10 -- हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने तांत्रिकों से इलाज को आधार बनाकर पुलिस ट्रेनिंग से लगातार गैर-मौजूद रहने को पूरी तरह अस्वीकार्य मानते हुए एक ट्रेनी लेडी कांस्टेबल की याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने साफ कहा कि तांत्रिकों से इलाज कराने को बीमारी का प्रमाण नहीं माना जा सकता और यह दलील जानबूझकर ट्रेनिंग से दूर रहने की वजह को छिपाने के लिए स्वीकार्य आधार नहीं हो सकती। न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की एकलपीठ ने पुलिस विभाग के 25 अगस्त 2010 के उस आदेश को सही बताया। इसके तहत याचिकाकर्त्ता को ट्रेनिंग के दौरान ही लेडी कांस्टेबल के पद से हटा दिया गया था। न्यायालय ने रिकॉर्ड देखने के बाद माना कि याचिकाकर्त्ता के पास अपनी लंबी अनुपस्थिति को साबित करने के लिए कोई मान्य मेडिकल सबूत नहीं था और उसने विभागीय प्रक्रिया के दौरान भी अपने दावों को प्र...
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