कानपुर, मार्च 26 -- पुलिस की मुखबिरी करते-करते एक आरोपी बड़ा गांजा तस्कर बन गया। पिछले 12 वर्षों से वह धड़ल्ले से अपना धंधा चला रहा था। इस दौरान वह कभी पकड़ा भी नहीं गया। इस बार भी पुलिस की पकड़ में तब आया जब कई मजबूत साक्ष्य सामने रखकर पूछताछ शुरू हुई। जांच में सामने आया कि आरोपी तस्कर ने फ्रेंचाइजी बांट रखी थी। प्रतिकिग्रा की दर से वह उन्हें भुगतान करता था। हम बात कर रहे हैं काकादेव के गांजा तस्कर उमेश चंद्र राजपूत उर्फ अश्वनी राजपूत की। फिलहाल वह जेल में है। काकादेव का उमेश उर्फ अश्वनी वर्ष 2012-13 में आर्म्स एक्ट में पकड़ा गया था। इसके बाद उसने क्षेत्रीय पुलिस की मुखबिरी शुरू कर दी। कुछ समय बाद ही वह शुक्लागंज के तस्कर अकबर अली उर्फ चिंगारी के संपर्क में आया। उमेश पहले उससे छोटी मात्रा में गांजा व चरस खरीदकर बेचता था। कई साल तक वह यह ...
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