सीतामढ़ी, जुलाई 9 -- रमेश कुमार परिहार। शराब बंदी कराने की मांग मुखर रूप से महिलाओं ने ही उठाई थी। उस समय यह आंदोलन उन मांओं, पत्नियों और बेटियों की पीड़ा का प्रतीक था, जिनके परिवार नशे की लत से बिखर रहे थे। लेकिन आज सीमावर्ती इलाकों में उभरती तस्वीर एक नई चिंता पैदा कर रही है। भारत-नेपाल सीमा से सटे क्षेत्रों में नशा तस्करी का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और इस अवैध धंधे में महिलाओं का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है।

नशे की तस्करी में महिलाओं की भूमिका परिहार, सोनबरसा, बैरगनिया और सुरसंड जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में शराबबंदी के बाद तस्करों ने अपनी रणनीति बदल ली है। पहले जहां इस कारोबार में पुरुषों की भूमिका प्रमुख होती थी, वहीं अब महिलाएं शराब, गांजा और अन्य नशीले पदार्थों की ढुलाई के लिए आगे की जा रही हैं। तस्करों का मानना है कि महिलाओं पर संदे...