प्रयागराज, अप्रैल 1 -- Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि मोहम्मदिया कानून के तहत, तलाक उसी तारीख से लागू होता है, जिस दिन पति तलाक का ऐलान करता है। बाद में कोर्ट का जो आदेश इसकी पुष्टि करता है, वह सिर्फ़ ऐलानिया प्रकृति का होता है। न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह ने हुमायरा रियाज़ की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि कोर्ट का ऐसा आदेश फैसले की तारीख से कोई नया तलाक नहीं बनाता, बल्कि यह तलाक के ऐलान की मूल तारीख से ही जुड़ा माना जाता है। बेंच ने साफ किया, यह भी तय है कि जहां कोई पति तलाक का ऐलान करता है। बाद में उसी के संबंध में आदेश लेने के लिए कोर्ट जाता है तो कोर्ट द्वारा पारित आदेश आम तौर पर ऐलानिया प्रकृति का होता है, जो सिर्फ उस तलाक की स्थिति को मान्यता देता है या उसकी पुष्टि करता है जो पहले ही हो चुका होता है। याचिका में ...