पीलीभीत, फरवरी 16 -- पीलीभीत। कुमाऊं में सर्दी खत्म होने के साथ ही नए बोआई सत्र के आगाज के साथ ही कुमाऊंनी होली का महत्व होता है। उत्तराखंड से सटे तराई जिले में काफी संख्या में बसे पर्वतीय समाज के लोगों ने बैठकी होली में रंगों की चमक बिखेरी। यूं तो कुमाऊँनी होली का रंग पहाड़ों पर वसंत पंचमी के दिन शुरू हो जाता है। पर इसके अलग अलग प्रारूप होते हैं। इसमें बैठकी होली, खड़ी होली और महिला होली के रंग दिखते हैं। इसमें होली पर सिर्फ अबीर-गुलाल का टीका ही नहीं होता। वरन बैठकी होली और खड़ी होली गायन की शास्त्रीय परंपरा भी शामिल होती है। महाशिवरात्रि के दिन से ही होल्यार घर-घर जाकर होली गाते हैं। यह उत्सव लगभग 15 तक चलता है। इसी क्रम मे निरंजन कुज कॉलोनी स्थित महामातेश्वरी मंदिर मे महाशिवरात्रि के अवसर पर बैठकी होली का आयोजन किया गया। महिलाओं ने ढो...